Marriage Certificate Online Apply 2026: शादी के बाद बहुत से लोग सोचते हैं कि अब मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने की क्या जल्दी है। लेकिन जब पासपोर्ट में पति या पत्नी का नाम जोड़ना हो, वीजा लेना हो, बैंक या बीमा में नॉमिनी बदलना हो या किसी सरकारी योजना का फॉर्म भरना हो, तब यही एक कागज सबसे पहले मांगा जाता है। अच्छी बात यह है कि अब ज्यादातर राज्यों में शादी का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन शुरू हो चुका है और घर बैठे आवेदन किया जा सकता है। इस लेख में आसान हिंदी में पूरी प्रक्रिया समझाई गई है, ताकि आप बिना किसी एजेंट के खुद आवेदन कर सकें।
Marriage Certificate 2026 की संक्षिप्त जानकारी
नीचे दी गई तालिका में पूरी प्रक्रिया का सार देख सकते हैं।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| सर्टिफिकेट का नाम | विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) |
| जारी करने वाला विभाग | राज्य का रजिस्ट्रेशन विभाग, सब रजिस्ट्रार या विवाह अधिकारी |
| लागू कानून | हिंदू विवाह अधिनियम 1955 या विशेष विवाह अधिनियम 1954 |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों |
| आवेदन कौन कर सकता है | पति और पत्नी दोनों मिलकर |
| शुल्क | राज्य के अनुसार अलग, आधिकारिक पोर्टल पर देखें |
| अंतिम अपडेट | 14 अक्टूबर 2026 |
मैरिज सर्टिफिकेट क्या होता है
मैरिज सर्टिफिकेट एक सरकारी दस्तावेज है, जो यह साबित करता है कि दो लोगों की शादी कानूनी रूप से दर्ज हो चुकी है। इसमें पति और पत्नी के नाम, शादी की तारीख, शादी की जगह, पता और गवाहों की जानकारी लिखी होती है। यह प्रमाण पत्र मंदिर की रसीद, निकाहनामा या शादी के कार्ड से अलग है। उन कागजों से रस्म का सबूत मिलता है, जबकि मैरिज सर्टिफिकेट सरकारी रिकॉर्ड में शादी दर्ज होने का सबूत होता है।
मैरिज सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है
सुप्रीम कोर्ट ने सीमा बनाम अश्विनी कुमार (2006) मामले में राज्यों को निर्देश दिया था कि सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए। इसी वजह से कई राज्यों में इसके नियम बने हैं। व्यवहार में यह दस्तावेज इन कामों में काम आता है।
- पासपोर्ट बनवाने या उसमें जीवनसाथी का नाम जोड़ने में
- विदेश यात्रा, स्पाउस वीजा या वर्क वीजा में
- शादी के बाद उपनाम बदलने में, जैसे आधार, पैन और बैंक खाते में
- बीमा, पेंशन और फैमिली पेंशन के दावे में
- संपत्ति या उत्तराधिकार से जुड़े विवाद में
- भरण पोषण या कानूनी मामलों में शादी का सबूत देने में
दो कानून, दो रास्ते: हिंदू विवाह अधिनियम और विशेष विवाह अधिनियम
भारत में विवाह रजिस्ट्रेशन मुख्य रूप से दो कानूनों के तहत होता है। आपको कौन सा रास्ता चुनना है, यह इस पर निर्भर करता है कि आपकी शादी पहले ही हो चुकी है या आप कानूनी रूप से शादी करने जा रहे हैं।
| बिंदु | हिंदू विवाह अधिनियम 1955 | विशेष विवाह अधिनियम 1954 |
|---|---|---|
| किन पर लागू | हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदाय | सभी धर्मों और अंतरधार्मिक जोड़ों पर |
| शादी कब होती है | पहले रीति रिवाज से शादी, फिर रजिस्ट्रेशन | कानूनी प्रक्रिया से शादी और रजिस्ट्रेशन साथ में |
| नोटिस | आम तौर पर जरूरी नहीं | शादी से पहले विवाह अधिकारी को नोटिस देना होता है |
| प्रतीक्षा अवधि | नहीं | नोटिस के बाद 30 दिन का समय |
| गवाह | राज्य के नियम के अनुसार दो या तीन | तीन गवाह |
| सर्टिफिकेट | रजिस्ट्रार द्वारा जारी | विवाह अधिकारी द्वारा जारी |
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 8 राज्य सरकारों को शादी के पंजीकरण के नियम बनाने का अधिकार देती है। इसी धारा में यह भी साफ लिखा है कि रजिस्ट्रेशन न कराने से शादी अमान्य नहीं हो जाती। फिर भी सर्टिफिकेट बनवाना समझदारी है, क्योंकि कागजी सबूत के बिना कई जगह परेशानी आती है। मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय के लोग अपने राज्य में लागू नियमों या विशेष विवाह अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
आवेदन के लिए पात्रता
मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए ये बुनियादी शर्तें आम तौर पर लागू होती हैं।
- दूल्हे की उम्र कम से कम 21 वर्ष और दुल्हन की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- शादी के समय दोनों में से किसी का जीवित जीवनसाथी नहीं होना चाहिए।
- दोनों मानसिक रूप से सहमति देने में सक्षम हों।
- दोनों आपस में निषिद्ध रिश्ते में न हों, जब तक उनकी परंपरा इसकी अनुमति न देती हो।
- हिंदू विवाह अधिनियम में शादी रीति रिवाज से हो चुकी हो।
- आवेदन उसी जिले या क्षेत्र में करें जहां शादी हुई या जहां आप रहते हैं, यह राज्य के नियम पर निर्भर करता है।
उम्र से जुड़े कानूनों में समय के साथ बदलाव की चर्चा होती रही है, इसलिए आवेदन से पहले अपने राज्य के पोर्टल पर लिखी शर्तें एक बार जरूर पढ़ लें।
जरूरी दस्तावेजों की सूची
हर राज्य की मांग थोड़ी अलग हो सकती है, पर आम तौर पर ये कागज लगते हैं।
| दस्तावेज | किसके लिए | उदाहरण |
|---|---|---|
| आयु प्रमाण | पति और पत्नी दोनों | 10वीं की मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट |
| पहचान प्रमाण | दोनों | आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड |
| पता प्रमाण | दोनों | आधार, बिजली बिल, राशन कार्ड |
| पासपोर्ट साइज फोटो | दोनों | हाल की रंगीन फोटो, संख्या पोर्टल पर देखें |
| शादी की फोटो | जोड़ा | शादी की रस्म की साफ तस्वीर |
| शादी का प्रमाण | जोड़ा | निमंत्रण पत्र, मंदिर या धर्मस्थल की रसीद |
| शपथ पत्र | जोड़ा | शादी की तारीख और जगह का एफिडेविट |
| गवाहों के कागज | गवाह | पहचान पत्र और फोटो |
| तलाक या मृत्यु प्रमाण | जरूरत पड़ने पर | दोबारा शादी की स्थिति में डिक्री या डेथ सर्टिफिकेट |
सभी दस्तावेज स्कैन करके साफ और पढ़ने लायक रूप में रखें। कई पोर्टल पर PDF या JPG की फाइल साइज की सीमा होती है, इसलिए अपलोड से पहले फॉर्मेट देख लें।
ऑनलाइन आवेदन की स्टेप बाय स्टेप प्रक्रिया
अलग राज्यों में वेबसाइट अलग है, लेकिन प्रक्रिया लगभग एक जैसी रहती है।
- अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट खोलें। जो पोर्टल .gov.in या .nic.in पर हो, उसी पर भरोसा करें।
- नया यूजर बनाएं। मोबाइल नंबर और ईमेल से रजिस्ट्रेशन करें और OTP से पुष्टि करें।
- लॉगिन करके विवाह पंजीकरण या Marriage Registration सेवा चुनें।
- पति और पत्नी की जानकारी भरें। नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, पता और धर्म ध्यान से लिखें।
- शादी की तारीख, जगह और विवाह का प्रकार भरें।
- गवाहों की जानकारी जोड़ें।
- जरूरी दस्तावेज और फोटो अपलोड करें।
- आवेदन देखकर जांच लें, फिर सबमिट करें।
- ऑनलाइन शुल्क जमा करें। UPI, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग का विकल्प मिल सकता है।
- आवेदन संख्या और रसीद सुरक्षित रखें।
- जिन राज्यों में अपॉइंटमेंट सिस्टम है, वहां तय तारीख पर पति, पत्नी और गवाह सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाएं।
- सत्यापन के बाद सर्टिफिकेट जारी होता है, जिसे पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है।
कुछ राज्यों में आवेदन ऑनलाइन होता है, लेकिन सत्यापन के लिए दफ्तर जाना जरूरी रहता है। इसलिए पूरी तरह घर बैठे सर्टिफिकेट मिलेगा या नहीं, यह राज्य की व्यवस्था पर निर्भर करता है।
कुछ राज्यों के पोर्टल, जो आमतौर पर उपयोग में आते हैं
नीचे कुछ राज्यों की ऑनलाइन सेवाएं दी गई हैं। वेबसाइट और सेवा का नाम समय के साथ बदल सकता है, इसलिए खोजने पर आधिकारिक पेज की पुष्टि जरूर करें।
| राज्य | आम तौर पर कहां से आवेदन होता है |
|---|---|
| महाराष्ट्र | igrmaharashtra.gov.in |
| कर्नाटक | कावेरी ऑनलाइन पोर्टल |
| दिल्ली | ई-डिस्ट्रिक्ट दिल्ली पोर्टल |
| बिहार | सेवा ऑनलाइन बिहार पोर्टल |
| उत्तर प्रदेश | रजिस्ट्रेशन विभाग का आधिकारिक पोर्टल |
| आंध्र प्रदेश और तेलंगाना | MeeSeva सेवा |
| मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्य | राज्य का ई-डिस्ट्रिक्ट, ई-मित्र या स्थानीय निकाय पोर्टल |
अगर आपको अपने राज्य का पोर्टल नहीं मिल रहा, तो नजदीकी सब रजिस्ट्रार कार्यालय, नगर निगम या नगर पालिका, पंचायत कार्यालय या जन सेवा केंद्र से पूछ सकते हैं।
फीस और कितना समय लगता है
शुल्क हर राज्य में अलग तय होता है। कई जगह सामान्य रजिस्ट्रेशन की फीस कम रखी जाती है, जबकि देर से आवेदन करने पर लेट फीस या जुर्माना लग सकता है। कुछ राज्यों में तत्काल सेवा का अलग शुल्क भी होता है। सटीक रकम के लिए आवेदन के पन्ने पर दिया गया शुल्क विवरण ही मानें। सोशल मीडिया या किसी निजी वेबसाइट पर लिखी रकम पर भरोसा न करें।
समय की बात करें तो, अगर सारे दस्तावेज सही हों, तो कई राज्यों में सत्यापन के बाद उसी दिन या कुछ कार्य दिवसों में सर्टिफिकेट मिल जाता है। कमी होने पर आपको सुधार के लिए संदेश आ सकता है और समय बढ़ जाता है।
विशेष विवाह अधिनियम के तहत प्रक्रिया
अंतरधार्मिक शादी या कोर्ट मैरिज के लिए विशेष विवाह अधिनियम में यह तरीका अपनाया जाता है।
- जोड़ा उस जिले के विवाह अधिकारी को नोटिस देता है, जहां कम से कम एक पक्ष पिछले 30 दिन से रह रहा हो।
- नोटिस 30 दिन तक सार्वजनिक रूप से लगाया जाता है, ताकि किसी को आपत्ति हो तो वह बता सके।
- आपत्ति न होने या आपत्ति खारिज होने पर निर्धारित समय में शादी की जाती है।
- विवाह अधिकारी के सामने जोड़ा और तीन गवाह घोषणा करते हैं।
- मैरिज सर्टिफिकेट बुक में सबके हस्ताक्षर होते हैं।
- इसके बाद विवाह प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
यह प्रमाण पत्र विशेष विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत शादी का पक्का सबूत माना जाता है। नियम राज्य और अदालत के निर्देशों के अनुसार थोड़े बदल सकते हैं, इसलिए वकील या विवाह अधिकारी से स्थानीय प्रक्रिया की पुष्टि कर लें।
आवेदन की स्थिति कैसे चेक करें और सर्टिफिकेट कैसे डाउनलोड करें
आवेदन के बाद आपको एक आवेदन संख्या मिलती है। इसी से आगे का काम होता है।
- पोर्टल पर लॉगिन करें।
- Track Application या आवेदन की स्थिति वाला विकल्प खोलें।
- आवेदन संख्या डालें।
- स्थिति देखें, जैसे लंबित, सत्यापन में, स्वीकृत या जारी।
- स्वीकृत होने पर Download Certificate पर क्लिक करें।
- PDF को अपने फोन और ईमेल दोनों में सुरक्षित रखें।
कुछ राज्यों में डिजिटल हस्ताक्षर वाली PDF मिलती है, जिसमें QR कोड भी होता है। ऐसे सर्टिफिकेट को कई कामों में सीधे मान्य माना जाता है, पर जरूरत पड़ने पर प्रिंटआउट और सत्यापित प्रति भी रखें।
ऑफलाइन आवेदन कैसे करें
अगर ऑनलाइन सुविधा नहीं है या आपको दफ्तर जाकर काम करना ठीक लगता है, तो ये तरीका अपनाएं।
- अपने इलाके के सब रजिस्ट्रार कार्यालय या नगर निगम कार्यालय जाएं।
- विवाह पंजीकरण का फॉर्म लें और भरें।
- सभी दस्तावेजों की स्व सत्यापित प्रतियां लगाएं।
- पति, पत्नी और गवाह तय तारीख पर हाजिर हों।
- शुल्क जमा करके रसीद लें।
- सत्यापन के बाद सर्टिफिकेट लें।
सर्टिफिकेट में गलती हो जाए या खो जाए तो क्या करें
नाम की स्पेलिंग, तारीख या पते में गलती दिखे तो तुरंत संबंधित कार्यालय में सुधार का आवेदन दें। इसके लिए आम तौर पर सही दस्तावेज, पुराना सर्टिफिकेट और एक शपथ पत्र लगता है। प्रमाण पत्र खो जाए तो पोर्टल से दोबारा डाउनलोड करें या कार्यालय में डुप्लीकेट कॉपी के लिए आवेदन करें। आवेदन संख्या या पुराना रिकॉर्ड हो तो काम जल्दी होता है।
फर्जी वेबसाइट और ठगी से कैसे बचें
मैरिज सर्टिफिकेट के नाम पर कई फर्जी साइट और एजेंट सक्रिय रहते हैं। इन बातों का ध्यान रखें।
- केवल सरकारी डोमेन वाली साइट पर ही आवेदन करें।
- कोई एजेंट तुरंत सर्टिफिकेट देने का वादा करे तो सावधान रहें।
- पैसे हमेशा आधिकारिक पेमेंट गेटवे से दें और रसीद जरूर लें।
- OTP, आधार नंबर या बैंक विवरण अनजान लोगों को न बताएं।
- किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले यूआरएल जांच लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कई राज्यों में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। हालांकि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार रजिस्ट्रेशन न कराने से शादी अमान्य नहीं होती। फिर भी सर्टिफिकेट बनवाना बहुत जरूरी माना जाता है।
क्या शादी के कई साल बाद भी सर्टिफिकेट बन सकता है? हां, आम तौर पर बन सकता है। देरी होने पर लेट फीस, शपथ पत्र या अतिरिक्त सबूत मांगे जा सकते हैं।
क्या पति और पत्नी दोनों का साथ जाना जरूरी है? ज्यादातर राज्यों में सत्यापन के लिए दोनों का उपस्थित होना जरूरी रहता है, साथ में गवाह भी होते हैं।
क्या आधार कार्ड जरूरी है? कई पोर्टल पर आधार से पहचान और पता सत्यापित किया जाता है, पर अन्य पहचान पत्र भी स्वीकार हो सकते हैं। यह राज्य के नियम पर निर्भर है।
क्या अंतरधार्मिक शादी में भी यह बन सकता है? हां, इसके लिए आमतौर पर विशेष विवाह अधिनियम का रास्ता अपनाया जाता है।
निष्कर्ष
मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना आज के समय में बहुत आसान हो गया है। बस आधिकारिक पोर्टल चुनें, सही दस्तावेज तैयार रखें, जानकारी ध्यान से भरें और आवेदन संख्या संभालकर रखें। अगर आपकी शादी हो चुकी है तो हिंदू विवाह अधिनियम का रास्ता और अगर कोर्ट मैरिज या अंतरधार्मिक विवाह करना है तो विशेष विवाह अधिनियम का रास्ता चुनें। किसी भी उलझन में अपने नजदीकी सब रजिस्ट्रार कार्यालय से जानकारी लें। जल्दी रजिस्ट्रेशन कराने से भविष्य की कई परेशानियों से बचा जा सकता है।
Disclaimer
इस लेख की जानकारी सामान्य कानूनी प्रावधानों और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है और केवल जानकारी के उद्देश्य से दी गई है। यह वेबसाइट किसी सरकारी विभाग से संबद्ध नहीं है। शुल्क, नियम, पोर्टल का नाम और दस्तावेजों की सूची हर राज्य में अलग होती है और समय के साथ बदल सकती है। आवेदन करने से पहले अपने राज्य के आधिकारिक पोर्टल या संबंधित कार्यालय से ताजा जानकारी जरूर जांच लें। कानूनी सलाह के लिए किसी योग्य वकील से संपर्क करें।






